सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4

राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित विवादों से जुड़ी नैतिक दुविधाओं का परीक्षण कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दें)

सरकारी और निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ और दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में कानून, नियम, विनियम और विवेक

परिचय

पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी

राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच एक जटिल नैतिक दुविधा प्रस्तुत करती है।

सीमाओं की सुरक्षा के लिए सड़कों, हवाई पट्टियों और सैन्य सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं,

फिर भी ये :contentReference[oaicite:0]{index=0} जैसे नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

इसलिए, नीति निर्माताओं को रणनीतिक अनिवार्यताओं को पारिस्थितिक जिम्मेदारी और अंतर-पीढ़ीगत न्याय के साथ संतुलित करना चाहिए।


शामिल नैतिक दुविधाएं

1. सुरक्षा बनाम पर्यावरण संरक्षण

  • सीमावर्ती बुनियादी ढांचा :contentReference[oaicite:1]{index=1} जैसे विरोधियों के खिलाफ राष्ट्रीय रक्षा को मजबूत करता है।

  • हालांकि, तेजी से होने वाले निर्माण से नाजुक पारिस्थितिक तंत्र में वनों की कटाई, जैव विविधता का नुकसान और भूस्खलन हो सकता है।

2. विकास बनाम स्वदेशी आजीविका

  • स्थानीय समुदायों को कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों से लाभ हो सकता है।

  • फिर भी विस्थापन और पारिस्थितिक गिरावट पारंपरिक आजीविका को खतरे में डाल सकती है।

3. उपयोगितावाद बनाम कर्तव्यशास्त्र (Deontological Duty)

  • उपयोगितावाद: परियोजनाओं को उचित ठहराया जा सकता है यदि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और जन कल्याण को अधिकतम करती हैं।

  • कर्तव्यशास्त्र नैतिकता: प्रकृति की रक्षा करना और पर्यावरण कानूनों को बनाए रखना राज्य का नैतिक कर्तव्य है।

4. शासन और नैतिक मूल्य

  • नोलन समिति के जवाबदेही, सत्यनिष्ठा, और निष्पक्षता जैसे सिद्धांत पारदर्शी पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की मांग करते हैं।

निष्कर्ष / आगे की राह

सतत बुनियादी ढांचे, पारदर्शी मंजूरियों, वैज्ञानिक पर्यावरणीय आकलनों

और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। नैतिक शासन को

यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पारिस्थितिक अखंडता और भावी पीढ़ियों के अधिकारों से समझौता किए बिना

राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया जाए।


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