सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4
समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, एक लोक सेवक नियामक के बजाय विकास के उत्प्रेरक और सक्रिय सुगमकर्ता के रूप में कार्य करता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप कौन से विशिष्ट उपाय सुझाएंगे? (150 शब्दों में उत्तर दें)
कानून, नियम, विनियम और अंतरात्मा नैतिक मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में
2025
10
अंक
प्रस्तावना
समग्र विकास में आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय स्थिरता और
समावेशी शासन शामिल हैं। इस संदर्भ में, एक सिविल सेवक की भूमिका केवल एक
नियामक से बदलकर विकास के प्रवर्तक और सुविधादाता की हो गई है। ऐसी भूमिका
सहभागी शासन, नवाचार और नागरिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है, जिससे प्रशासन
नैतिक सार्वजनिक सेवा के सिद्धांतों के अनुरूप बनता है।
सिविल सेवकों को विकास के प्रवर्तक के रूप में कार्य करने के उपाय
1. सहभागी शासन को बढ़ावा देना
योजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
:contentReference[oaicite:0]{index=0} जैसी जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करना।
2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार करने में सुगमता) को सुगम बनाना
उद्यमियों और निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नौकरशाही बाधाओं को कम करना।
पारदर्शी और डिजिटल शासन प्रणालियों को बढ़ावा देना।
3. नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना
कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के साथ सहयोग करना।
सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को अपनाना।
4. नैतिक और समावेशी शासन सुनिश्चित करना
नोलां सिद्धांतों जैसे वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही और नेतृत्व का पालन करना।
लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से हाशिए पर मौजूद समुदायों को सशक्त बनाना।
5. नैतिक आदर्शों से सीखना
:contentReference[oaicite:1]{index=1} जैसे प्रशासकों ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे संवेदनशील प्रशासन सामाजिक परिवर्तन को सक्षम बना सकता है।
निष्कर्ष
भागीदारी, नवाचार, पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ावा देकर, सिविल सेवक
प्रशासन को एक नियंत्रण-उन्मुख प्रणाली से एक सुविधाजनक ढांचे में बदल सकते हैं जो सतत
और समग्र विकास को बढ़ावा देता है।
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