सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
नागरिक समाज संगठनों (CSO) को अक्सर गैर-सरकारी अभिनेताओं (non-State actors) की तुलना में राज्य-विरोधी अभिनेताओं (anti-State actors) के रूप में देखा जाता है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? औचित्य सिद्ध कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
2025
10
अंक
परिचय
नागरिक समाज संगठन (CSOs) स्वैच्छिक, गैर-सरकारी समूह हैं जो सामाजिक कल्याण, जवाबदेही और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में काम करते हैं। भारत में, वे शासन के पूरक के रूप में गैर-राज्य अभिनेताओं (non-State actors) के रूप में कार्य करते हैं। हालांकि, जब वे सरकारी नीतियों को चुनौती देते हैं, तो उन्हें कभी-कभी राज्य-विरोधी अभिनेताओं (anti-State actors) के रूप में भी देखा जाता है।
मुख्य भाग (Body)
नागरिक समाज संगठनों (CSOs) को राज्य-विरोधी क्यों माना जाता है
नीति आलोचना: CSOs अक्सर पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकारों और विकास परियोजनाओं जैसे मुद्दों पर सरकारी फैसलों पर सवाल उठाते हैं।
वकालत और विरोध प्रदर्शन: बड़े बांधों या खनन जैसी परियोजनाओं के खिलाफ अभियान राज्य के अधिकार के विरोध के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
विदेशी फंडिंग संबंधी चिंताएं: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), 2010 जैसे नियामक ढांचे घरेलू नीति पर बाहरी प्रभाव को लेकर चिंताओं को उजागर करते हैं।
CSOs अनिवार्य रूप से गैर-राज्य अभिनेता क्यों हैं
लोकतांत्रिक जवाबदेही: वे निगरानी संस्थाओं (watchdogs) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे पारदर्शिता और सुशासन मजबूत होता है।
सेवा वितरण: CSOs स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में सहायता करते हैं।
जनभागीदारी: वे नागरिकों की आवाज़ उठाते हैं और सहभागी शासन को सुगम बनाते हैं, जैसा कि द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा रेखांकित किया गया है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, CSOs को मुख्य रूप से प्रतिद्वंद्वियों के बजाय शासन में भागीदारों के रूप में देखा जाना चाहिए। राज्य और नागरिक समाज के बीच सकारात्मक जुड़ाव लोकतंत्र, जवाबदेही और समावेशी विकास को मजबूत कर सकता है।
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