सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
ई-गवर्नेंस परियोजनाओं में यूजर-केंद्रित डिज़ाइन (उपयोगकर्ता-अनुकूल डिज़ाइन) की तुलना में तकनीक और बैक-एंड एकीकरण के प्रति एक अंतर्निहित झुकाव होता है। परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता और जवाबदेही, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमता
2025
10
अंक
परिचय
ई-गवर्नेंस का तात्पर्य सार्वजनिक सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और पहुंच में सुधार के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग से है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत पहलों ने डिजिटल गवर्नेंस का महत्वपूर्ण रूप से विस्तार किया है। हालांकि, कई परियोजनाएं उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवा डिज़ाइन के बजाय प्रौद्योगिकी-संचालित बैक-एंड एकीकरण के प्रति झुकाव प्रदर्शित करती हैं।
मुख्य भाग
प्रौद्योगिकी-केंद्रित झुकाव के कारण
प्रशासनिक फोकस: कई परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा के बजाय डेटाबेस एकीकरण और आंतरिक दक्षता को प्राथमिकता देती हैं।
शीर्ष-से-निम्न (टॉप-डाउन) योजना: अंतिम-उपयोगकर्ताओं के साथ सीमित परामर्श के कारण ऐसी प्रणालियां बनती हैं जो तकनीकी रूप से तो उन्नत होती हैं लेकिन उनका उपयोग करना कठिन होता है।
डिजिटल विभाजन: खराब डिजिटल साक्षरता, भाषा संबंधी बाधाएं और सीमित इंटरनेट पहुंच हाशिए पर मौजूद समूहों के लिए उपयोगिता को कम करती है।
जटिल इंटरफ़ेस: सरकारी पोर्टलों में अक्सर जटिल प्रक्रियाएं और कई प्रमाणीकरण परतें होती हैं।
उपयोगकर्ता-केंद्रित डिज़ाइन की आवश्यकता
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने नागरिक-केंद्रित शासन और सरलीकृत सेवा वितरण पर जोर दिया थ।
UMANG और DigiLocker जैसे प्लेटफॉर्म एकीकृत और उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस के माध्यम से सुधार प्रदर्शित करते हैं।
डिज़ाइन थिंकिंग (सृजनात्मक विचार प्रक्रिया), बहुभाषी प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन सहायता पहुंच को बढ़ा सकते हैं।
निष्कर्ष
ई-गवर्नेंस को समावेशिता और दक्षता के अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, परियोजनाओं को प्रौद्योगिकी-केंद्रित दृष्टिकोण से नागरिक-केंद्रित डिज़ाइन की ओर स्थानांतरित होना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि डिजिटल सेवाएं सुलभ, सरल और नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी हों।
No comments yet. Be the first to join the discussion!






