सामान्य अध्ययन पेपर 3
भारत में उच्च मूल्य वाली फसलों के चयन पर किसानों के निर्णय को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए। (150 शब्दों में उत्तर दें)
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित मुद्दे; सार्वजनिक वितरण प्रणाली - उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे; प्रौद्योगिकी मिशन; पशुपालन का अर्थशास्त्र।/कृषि उपज का भंडारण, परिवहन और विपणन तथा मुद्दे और संबंधित बाधाएं; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।
2025
10
अंक
प्रस्तावना
फलों, सब्जियों, मसालों, फूलों की खेती और वृक्षारोपण जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें (HVCs) मुख्य खाद्यान्नों की तुलना में प्रति हेक्टेयर अधिक वित्तीय लाभ प्रदान करती हैं। भारत का बागवानी उत्पादन ~350 मिलियन टन को पार कर गया है, जो विविधीकृत कृषि की ओर एक क्रमिक बदलाव को दर्शाता है। किसानों द्वारा उच्च मूल्य वाली फसलों (HVCs) को उगाने का निर्णय आर्थिक, संस्थागत और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है।
मुख्य भाग
किसानों के चयन को प्रभावित करने वाले कारक
बाजार की मांग और मूल्य: बढ़ती आय, शहरीकरण और खान-पान के बदलते तौर-तरीकों से फलों, सब्जियों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ती है, जिससे बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित होती है।
कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ: मिट्टी की गुणवत्ता, वर्षा और तापमान फसल की उपयुक्तता निर्धारित करते हैं (जैसे, महाराष्ट्र में अंगूर, केरल में मसाले)।
सिंचाई और पानी की उपलब्धता: विश्वसनीय सिंचाई और ड्रिप एवं स्प्रिंकलर (टपकन और छिड़काव) प्रणाली जैसी प्रौद्योगिकियां जल-संवेदनशील बागवानी फसलों की खेती का समर्थन करती हैं।
सरकारी नीतियां: एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), सब्सिडी और फसल बीमा जैसी योजनाएं विविधीकरण को बढ़ावा देती हैं।
बुनियादी ढांचा और मूल्य श्रृंखलाएं: कोल्ड स्टोरेज (शीत गृह), परिवहन, प्रसंस्करण इकाइयों और ई-नाम (e-NAM) बाजारों की उपलब्धता फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करती है।
प्रौद्योगिकी और विस्तार सहायता: उन्नत बीज, ग्रीनहाउस खेती और डिजिटल परामर्श सेवाएं उत्पादकता बढ़ाती हैं।
निष्कर्ष
इस प्रकार, उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाना बाजार के प्रोत्साहन, संसाधनों की उपलब्धता, प्रौद्योगिकी और संस्थागत सहायता के परस्पर प्रभाव पर निर्भर करता है। आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और जोखिमों को कम करने से विविधीकरण में तेजी आ सकती है और किसानों की उच्च आय तथा संधारणीय कृषि के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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