सामान्य अध्ययन पेपर 3
भारत में संलयन ऊर्जा (फ्यूजन एनर्जी) कार्यक्रम पिछले कुछ दशकों में लगातार विकसित हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय संलयन ऊर्जा परियोजना 'इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर' (ITER) में भारत के योगदान का उल्लेख कीजिए। वैश्विक ऊर्जा के भविष्य के लिए इस परियोजना की सफलता के क्या निहितार्थ होंगे? (150 शब्दों में उत्तर दें)
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।/विज्ञान और प्रौद्योगिकी- रोजमर्रा के जीवन में विकास और उनके अनुप्रयोग और प्रभाव।
2025
10
अंक
प्रस्तावना
परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, जिससे भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। इसे स्वच्छ, सुरक्षित और वस्तुतः असीमित ऊर्जा का एक संभावित स्रोत माना जाता है। फ्रांस में बनाया जा रहा इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) दुनिया का सबसे बड़ा संलयन प्रयोग है, जिसमें भारत, यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका, रूस, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं।
मुख्य भाग
ITER में भारत का योगदान
महत्वपूर्ण घटकों का विनिर्माण: भारत रिएक्टर के प्रमुख घटकों की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार है, जैसे कि क्रायोस्टेट, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्टेनलेस-स्टील वैक्यूम चैंबर है।
कूलिंग वॉटर सिस्टम (शीतलन जल प्रणालियाँ): भारतीय उद्योग अत्यधिक तापमान को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक जटिल कूलिंग सिस्टम विकसित कर रहे हैं।
इन-वॉल शील्डिंग और बिजली आपूर्ति: भारत प्लाज्मा संचालन के लिए शील्डिंग घटकों और विद्युत प्रणालियों का योगदान दे रहा है।
औद्योगिक भागीदारी: भारतीय कंपनियां और अनुसंधान संस्थान जैसे प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (IPR) इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं।
ITER की सफलता के निहितार्थ
स्वच्छ ऊर्जा स्रोत: संलयन बिना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के ऊर्जा का उत्पादन करता है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है।
ऊर्जा सुरक्षा: यह ड्यूटेरियम और ट्रिटियम जैसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध ईंधनों का उपयोग करता है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है।
कम परमाणु कचरा: पारंपरिक परमाणु विखंडन (फिशन) की तुलना में संलयन से बहुत कम रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न होता है।
तकनीकी प्रगति: यह पदार्थ विज्ञान, अतिचालकता (सुपरकंडक्टिविटी) और प्लाज्मा भौतिकी में नवाचार को बढ़ावा देता है।
निष्कर्ष
यदि ITER सफल होता है, तो यह एक सतत और कम कार्बन वाले ऊर्जा स्रोत प्रदान करके वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में क्रांति ला सकता है। यह वैश्विक जलवायु लक्ष्यों का पुरजोर समर्थन करेगा और देशों को एक सुरक्षित और स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करेगा।
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