यूपीएससी समाजशास्त्र मुख्य वैकल्पिक परीक्षा पेपर 1 और 2 का पाठ्यक्रम

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एकता में हाथ मिलाते लोगों का समूह, जिस पर "UPSC Sociology Syllabus" लिखा हुआ है।

परिचय

परिचय

समाजशास्त्र वैकल्पिक (Sociology Optional) क्या है?

UPSC मुख्य परीक्षा में, उम्मीदवार एक वैकल्पिक विषय चुनते हैं, और समाजशास्त्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। UPSC के लिए समाजशास्त्र वैकल्पिक पाठ्यक्रम में समाज, सामाजिक संस्थानों और परिवर्तन का वैज्ञानिक अध्ययन शामिल है। 
इसे दो पत्रों में विभाजित किया गया है - पेपर I (समाजशास्त्र के सिद्धांत) और पेपर II (भारतीय समाज: संरचना और परिवर्तन) - प्रत्येक 250 अंकों का है, जो मुख्य परीक्षा में कुल 500 अंक बनाता है। यदि आप समाज, सामाजिक परिवर्तन और वास्तविक दुनिया के मुद्दों का अध्ययन करना पसंद करते हैं, तो समाजशास्त्र आपके लिए एक आदर्श वैकल्पिक विषय हो सकता है। यह समाज कैसे कार्य और विकसित होता है, इस बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। कई उम्मीदवारों को लगता है कि UPSC के लिए समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम तुलनात्मक रूप से संक्षिप्त और जुड़ाव महसूस कराने वाला (relatable) है - आखिर, यह उसी समाज के बारे में है जिसमें हम रहते हैं।

UPSC IAS Mains Optional Sociology detailed syllabus cover with icons of books, people, networks, and communication.

अन्य वैकल्पिक विषयों के बारे में बेहतर ढंग से समझने के लिए पढ़ें: मुख्य परीक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ UPSC वैकल्पिक विषय कैसे चुनें: एक संपूर्ण तैयारी मार्गदर्शिका - PadhAI

समाजशास्त्र वैकल्पिक विषय क्यों चुनें?

  • संक्षिप्त, वैचारिक पाठ्यक्रम (Syllabus): समाजशास्त्र का एक अच्छी तरह से परिभाषित, अपेक्षाकृत छोटा पाठ्यक्रम है। मुख्य विषयों को समझना बेहद सरल है, जिससे कुछ ही महीनों में पूरे पाठ्यक्रम को पूरा करना आसान हो जाता है।

  • अत्यधिक अंकदायी (Scoring): ऐतिहासिक रूप से, समाजशास्त्र सबसे अधिक अंक दिलाने वाले वैकल्पिक विषयों में से एक रहा है। यह वस्तुनिष्ठ और संक्षिप्त उत्तर लिखने की अनुमति देता है। टॉपर्स के आंकड़े और रुझान दिखाते हैं कि कई उम्मीदवार औसतन 250+/500 अंक प्राप्त करते हैं।

  • जीएस (GS) और निबंध के साथ समानता (Overlap): समाजशास्त्र के कई विषय सामान्य अध्ययन (जैसे भारतीय समाज, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएं, नैतिकता, शासन) और निबंध के प्रश्नपत्रों से मेल खाते हैं। यह तालमेल पढ़ाई का समय बचाता है और आपकी समग्र तैयारी को समृद्ध बनाता है।

  • सभी पृष्ठभूमि के लोगों के लिए आसान: इसके लिए किसी पूर्व शैक्षणिक पृष्ठभूमि की आवश्यकता नहीं होती है। मानविकी, वाणिज्य या इंजीनियरिंग क्षेत्र के उम्मीदवार भी एनसीईआरटी (NCERT) पुस्तकों, इग्नू (IGNOU) सामग्री और क्लास नोट्स के माध्यम से इसे आसानी से समझ सकते हैं। मीडिया में आने वाले रोजमर्रा के सामाजिक मुद्दे भी इस समझ को और मजबूत करते हैं।

  • प्रचुर संसाधन: गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है (NCERTs, IGNOU नोट्स, ऑनलाइन लेक्चर्स)। यह प्रचुर मात्रा में संदर्भ स्रोत और सहकर्मियों के साथ चर्चा के मंच सुनिश्चित करता है।

Infographic showing pros and cons of sociology as an optional subject for UPSC, listing benefits like overlap with GS Paper I and high success rate, and challenges like abstract theories, strong competition, and unsuitability for science backgrounds.

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यूपीएससी वैकल्पिक विषय के लिए समाजशास्त्र पाठ्यक्रम – विस्तृत पाठ्यक्रम और संसाधन

प्रश्नपत्र I - समाजशास्त्र की बुनियादी बातें (250 अंक)

इकाई

विषय

1. समाजशास्त्र - विषय

(a) यूरोप में आधुनिकता और सामाजिक परिवर्तन तथा समाजशास्त्र का उद्भव।

(b) विषय का दायरा और अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ तुलना।

(c) समाजशास्त्र और सामान्य समझ।

2. विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र

(a) विज्ञान, वैज्ञानिक पद्धति और आलोचना।

(b) अनुसंधान पद्धति के प्रमुख सैद्धांतिक पक्ष।

(c) प्रत्यक्षवाद और उसकी आलोचना।

(d) तथ्य मूल्य और वस्तुनिष्ठता।

(e) गैर-प्रत्यक्षवादी पद्धतियां।

3. अनुसंधान पद्धतियां और विश्लेषण

(a) गुणात्मक और मात्रात्मक पद्धतियां।

(b) डेटा संग्रह की तकनीकें।

(c) चर, नमूनाकरण, परिकल्पना, विश्वसनीयता और वैधता।

4. समाजशास्त्रीय विचारक

(a) कार्ल मार्क्स - ऐतिहासिक भौतिकवाद, उत्पादन के साधन, अलगाव, वर्ग संघर्ष।

(b) एमिल दुर्खीम - श्रम विभाजन, सामाजिक तथ्य, आत्महत्या, धर्म और समाज।

(c) मैक्स वेबर - सामाजिक क्रिया, आदर्श प्रकार, सत्ता, नौकरशाही, प्रोटेस्टेंट नैतिकता और पूंजीवाद की भावना।

(d) टैलकॉट पार्सन्स - सामाजिक व्यवस्था, पैटर्न चर।

(e) रॉबर्ट के. मर्टन - प्रकट और अप्रकट कार्य, अनुरूपता और विचलन, संदर्भ समूह।

(f) मीड - स्व और पहचान।

5. स्तरीकरण और गतिशीलता

(a) अवधारणाएं - समानता, असमानता, पदानुक्रम, बहिष्कार, गरीबी और अभाव।

(b) सामाजिक स्तरीकरण के सिद्धांत - संरचनात्मक प्रकार्यवादी सिद्धांत, मार्क्सवादी सिद्धांत, वेबरवादी सिद्धांत।

(c) आयाम - वर्ग, स्थिति समूह, लिंग, जातीयता और नस्ल का सामाजिक स्तरीकरण।

(d) सामाजिक गतिशीलता - खुली और बंद प्रणालियां, गतिशीलता के प्रकार, गतिशीलता के स्रोत और कारण।

6. कार्य और आर्थिक जीवन

(a) विभिन्न प्रकार के समाजों में काम का सामाजिक संगठन - दास समाज, सामंती समाज, औद्योगिक पूंजीवादी समाज।

(b) काम का औपचारिक और अनौपचारिक संगठन।

(c) श्रम और समाज।

7. राजनीति और समाज

(a) सत्ता के समाजशास्त्रीय सिद्धांत।

(b) सत्ता अभिजात वर्ग, नौकरशाही, दबाव समूह और राजनीतिक दल।

(c) राष्ट्र, राज्य, नागरिकता, लोकतंत्र, नागरिक समाज, विचारधारा।

(d) विरोध, आंदोलन, सामाजिक आंदोलन, सामूहिक कार्रवाई, क्रांति।

8. धर्म और समाज

(a) धर्म के समाजशास्त्रीय सिद्धांत।

(b) धार्मिक प्रथाओं के प्रकार: जीववाद, अद्वैतवाद, बहुलवाद, संप्रदाय, पंथ।

(c) आधुनिक समाज में धर्म: धर्म और विज्ञान, धर्मनिरपेक्षता, धार्मिक पुनरुत्थानवाद, कट्टरवाद।

9. रिश्तेदारी की प्रणालियां

(a) परिवार, गृहस्थी, विवाह।

(b) परिवार के प्रकार और रूप।

(c) वंश और अवतरण।

(d) पितृसत्ता और श्रम का यौन विभाजन।

(e) समकालीन रुझान।

10. आधुनिक समाज में सामाजिक परिवर्तन

(a) सामाजिक परिवर्तन के समाजशास्त्रीय सिद्धांत।

(b) विकास और निर्भरता।

(c) सामाजिक परिवर्तन के एजेंट।

(d) शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन।

(e) विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तन।

प्रश्नपत्र II – भारतीय समाज: संरचना और परिवर्तन (250 अंक)

निम्नलिखित तालिका में यूपीएससी समाजशास्त्र वैकल्पिक परीक्षा के प्रश्नपत्र 2 के विषय शामिल हैं:

विषय

उप-विषय

  1. भारतीय समाज का परिचय

(a) भारतीय समाज के अध्ययन पर दृष्टिकोण

(i) भारतविद्या (जी.एस. घुर्ये), 

(ii) संरचनात्मक-प्रकार्यवाद (एम.एन. श्रीनिवास), 

(iii) मार्क्सवादी (ए.आर. देसाई)।

(b) भारतीय समाज पर औपनिवेशिक शासन का प्रभाव 

(i) भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि, 

(ii) भारतीय परंपरा का आधुनिकीकरण

(iii) औपनिवेशिक काल के दौरान विरोध और आंदोलन

(iv) सामाजिक सुधार

  1. सामाजिक संरचना  

(a) ग्रामीण और कृषि सामाजिक संरचना

(i) भारतीय गाँव और गाँव के अध्ययन का विचार

(ii) कृषि सामाजिक संरचना— भूमि व्यवस्था का विकास, भूमि सुधार


(b) जाति व्यवस्था

(i) जाति व्यवस्था के अध्ययन पर दृष्टिकोण: जी. एस. घुर्ये, एम. एन. श्रीनिवास, लुई ड्युमॉन्ट, आंद्रे बेते।

(ii) जाति व्यवस्था की विशेषताएं।

(iii) अस्पृश्यता - रूप और दृष्टिकोण।


(c) भारत में जनजातीय समुदाय:

(i) परिभाषा संबंधी समस्याएं।

(ii) भौगोलिक प्रसार।

(iii) औपनिवेशिक नीतियां और जनजातियां।

(iv) एकीकरण और स्वायत्तता के मुद्दे।


(d) भारत में सामाजिक वर्ग

(i) कृषि वर्ग संरचना।

(ii) औद्योगिक वर्ग संरचना।

(iii) भारत में मध्यम वर्ग।


(e) भारत में रिश्तेदारी की प्रणालियां

(i) भारत में वंश और अवतरण

(ii) रिश्तेदारी प्रणालियों के प्रकार

(iii) भारत में परिवार और विवाह

(iv) परिवार के घरेलू आयाम

(v) पितृसत्ता, अधिकार और श्रम का यौन विभाजन।


(f) धर्म और समाज

(i) भारत में धार्मिक समुदाय

(ii) धार्मिक अल्पसंख्यकों की समस्याएं

C. भारत में सामाजिक परिवर्तन

(a) भारत में सामाजिक परिवर्तन की परिकल्पना:

(i) विकास योजना और मिश्रित अर्थव्यवस्था का विचार।

(ii) संविधान, कानून और सामाजिक परिवर्तन।

(iii) शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन


(b) भारत में ग्रामीण और कृषि परिवर्तन

(i) ग्रामीण विकास के कार्यक्रम, सामुदायिक विकास कार्यक्रम, सहकारी समितियां, गरीबी उन्मूलन योजनाएं।

(ii) हरित क्रांति और सामाजिक परिवर्तन।

(iii) भारतीय कृषि में उत्पादन के बदलते तरीके।

(iv) ग्रामीण श्रम, बंधुआ मजदूरी, प्रवासन की समस्याएं।


(c) भारत में औद्योगीकरण और शहरीकरण

(i) भारत में आधुनिक उद्योग का विकास।

(ii) भारत में शहरी बस्तियों की वृद्धि।

(iii) श्रमिक वर्ग: संरचना, विकास, वर्ग लामबंदी।

(iv) अनौपचारिक क्षेत्र, बाल श्रम।

(v) शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ियां और अभाव


(d) राजनीति और समाज

(i) राष्ट्र, लोकतंत्र और नागरिकता।

(ii) राजनीतिक दल, दबाव समूह, सामाजिक और राजनीतिक अभिजात वर्ग।

(iii) क्षेत्रवाद और सत्ता का विकेंद्रीकरण।

(iv) धर्मनिरपेक्षता।


(e) आधुनिक भारत में सामाजिक आंदोलन

(i) किसान और कृषक आंदोलन।

(ii) महिला आंदोलन।

(iii) पिछड़े वर्ग और दलित आंदोलन।

(iv) पर्यावरण आंदोलन।

(v) जातीयता और पहचान आंदोलन।


(f) जनसंख्या गतिशीलता

(i) जनसंख्या का आकार, वृद्धि, संरचना और वितरण।

(ii) जनसंख्या वृद्धि के घटक: जन्म, मृत्यु, प्रवासन।

(iii) जनसंख्या नीति और परिवार नियोजन।

(iv) उभरते मुद्दे: बुढ़ापा, लिंग अनुपात, बाल और शिशु मृत्यु दर, प्रजनन स्वास्थ्य


(g) सामाजिक परिवर्तन की चुनौतियां

(i) विकास का संकट: विस्थापन, पर्यावरणीय समस्याएं और स्थिरता।

(ii) गरीबी, अभाव और असमानताएं।

(iii) महिलाओं के खिलाफ हिंसा।

(iv) जातीय संघर्ष।

(v) सांप्रदायिक संघर्ष, सांप्रदायिकता, धार्मिक पुनरुत्थानवाद।

(vi) निरक्षरता और शिक्षा में असमानताएं

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यूपीएससी के लिए समाजशास्त्र वैकल्पिक पाठ्यक्रम पर अनुशंसित पुस्तकें

निम्नलिखित तालिका आपको महत्वपूर्ण समाजशास्त्र वैकल्पिक पुस्तकों की सूची प्रदान करती है जो आपको UPSC समाजशास्त्र वैकल्पिक परीक्षा की तैयारी में मदद कर सकती हैं: 

पेपर

UPSC समाजशास्त्र वैकल्पिक पुस्तक के शीर्षक

लेखक

पेपर I

Sociology: Themes and Perspectives

हैरालोंबोस और होलबॉर्न


Introduction to Sociology

एंथनी गिडेंस


Sociological Theory

जॉर्ज रित्ज़र


Sociology: Principles of Sociology with an Introduction to Social Thought

सी.एन. शंकर राव


Social Stratification

ओ.पी. गौबा


Political Theory

ओ.पी. गौबा


IGNOU BA/MA समाजशास्त्र नोट्स


NCERT समाजशास्त्र (कक्षा XI और XII)

पेपर II

Social Change in Modern India

एम.एन. श्रीनिवास


Social Background of Indian Nationalism

ए.आर. देसाई


Caste, Class and Power

आंद्रे बेतेई


Indian Society: Themes and Social Issues

नदीम हसनैन


Tribal India

नदीम हसनैन


Modernization of Indian Tradition

योगेंद्र सिंह


Handbook of Indian Sociology

वीना दास (संपादक)


Social Movements in India

घनश्यामु शाह


Politics in India

रजनी कोठारी


Social Problems in India

राम आहूजा


IGNOU भारतीय समाज नोट्स


भारत की जनगणना, NFHS, आर्थिक सर्वेक्षण

सरकारी स्रोत

Google पर पसंदीदा स्रोत के रूप में जोड़ें

UPSC समाजशास्त्र वैकल्पिक पाठ्यक्रम की तैयारी की रणनीति

शुरुआत कैसे करें:

  • सबसे पहले पाठ्यक्रम का मानचित्रण (मैपिंग) करें, फिर पिछले वर्षों के प्रश्नों को स्कैन करके परीक्षा की मांग को समझें कि विषय किस तरह से तैयार किए गए हैं और उत्तरों में किस गहराई की अपेक्षा की जाती है।

  • उच्च-उत्पादकता (हाई-यील्ड) वाले विषयों को प्राथमिकता देने के लिए इस मैपिंग का उपयोग करें और एक साप्ताहिक योजना तैयार करें जो वैचारिक पढ़ने और उत्तर अभ्यास के बीच संतुलन बनाए रखे।

प्रश्न पत्र के अनुसार दृष्टिकोण:

  • पेपर I (स्थिर मूल विषय): विचारकों, सिद्धांतों और विधियों में महारत हासिल करें; प्रति विचारक संक्षिप्त एक-पृष्ठ की शीट बनाएं (मुख्य अवधारणाएं, आलोचनाएं, भारतीय जुड़ाव)।

  • पेपर II (भारतीय समाज, गतिशील): समसामयिक मुद्दों और नीति रिपोर्टों पर नज़र रखें; हमेशा व्यावहारिक साक्ष्यों और भारतीय संदर्भों में उत्तरों को आधार बनाएं।

परस्पर जोड़ने (इंटरलिंकिंग) की रणनीति:

  • पेपर I को हमेशा पेपर II के साथ जोड़ें: भारतीय विकास (जाति गतिशीलता, शहरीकरण, सामाजिक आंदोलन, पारिवारिक परिवर्तन) की व्याख्या करने के लिए मार्क्स, वेबर, दुर्खीम, मर्टन, पार्सन्स, मीड आदि का उपयोग करें।

  • पेपर I में, समाजशास्त्रीय कल्पना को क्रियाशील दिखाने के लिए भारतीय उदाहरणों (एनसीआरबी/एनएफएचएस डेटा, केस स्टडीज, फील्ड स्निपेट्स) के साथ सिद्धांत को स्पष्ट करें।

स्रोत और अनुक्रमण:

  • एनसीईआरटी (NCERT) से शुरुआत करें, फिर मानक पाठ्यपुस्तकों पर जाएं; भारतीय उदाहरणों के साथ एक संक्षिप्त शोध विधियों की फॉर्मूला शीट बनाए रखें।

पीवाईक्यू (PYQs) आधारित सुधार:

  • पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) को विषय के अनुसार समूहीकृत करें (जैसे, जाति, रिश्तेदारी, धर्म, सामाजिक परिवर्तन; शहरीकरण, उद्योग, सामाजिक आंदोलन) और बार-बार पूछे जाने वाले दृष्टिकोणों (वैचारिक, आलोचनात्मक, नीतिगत, डेटा) की पहचान करें।

  • खाली शुरुआत से बचने और उच्च गुणवत्ता वाले निष्कर्ष सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रमुख विषय के लिए "माइक्रो-इंट्रो" (सूक्ष्म-प्रस्तावना) और "क्लोजिंग लाइन्स" (अंतिम पंक्तियां) तैयार करें।

बचने योग्य सामान्य गलतियाँ:

  • बिना सिद्धांत के वर्णनात्मक सूचियों, पुराने डेटा, कमजोर अंतर्संबंधों और अत्यधिक लंबी प्रस्तावनाओं से बचें जो विश्लेषण का समय छीन लेती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मुझे समाजशास्त्र (Sociology) यूपीएससी के प्रश्न पत्र और पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) कहाँ मिल सकते हैं?
क्या यूपीएससी की तैयारी के लिए इग्नू (IGNOU) समाजशास्त्र के नोट्स उपयोगी हैं?
मैं यूपीएससी समाजशास्त्र वैकल्पिक पाठ्यक्रम (Syllabus) का पीडीएफ कैसे डाउनलोड कर सकता हूं?
समाजशास्त्र को यूपीएससी के लिए एक लोकप्रिय वैकल्पिक विषय क्यों माना जाता है?
समाजशास्त्र (Sociology) वैकल्पिक विषय के लिए अध्ययन की कुछ अनुशंसित रणनीतियाँ क्या हैं?

निष्कर्ष

निष्कर्ष

समाजशास्त्र उन उम्मीदवारों के लिए बेहद उपयुक्त है जो विचारों को वास्तविक जीवन से जोड़ना पसंद करते हैं: इसका पाठ्यक्रम सीमित है, अवधारणाएं सहज हैं, और यही पढ़ाई सामान्य अध्ययन और निबंध में उत्तरों को और गहरा बनाती है। एक समझदारी भरा दृष्टिकोण सरल है—मूल विचारकों और पद्धतियों को समझें, भारतीय समाज के उदाहरणों और हाल के आंकड़ों को संभाल कर रखें, और संक्षिप्त, सिद्धांत-आधारित उत्तर लिखने का अभ्यास करें। निरंतर पुनरीक्षण और नियमित उत्तर लेखन अभ्यास के साथ, समाजशास्त्र न केवल प्रबंधनीय बल्कि फलदायी भी बन जाता है, जिससे मुख्य परीक्षा (Mains) हॉल में आपकी तैयारी में स्पष्टता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

सुझाए गए ब्लॉग 

बाहरी लिंकिंग सुझाव

  • यूपीएससी आधिकारिक वेबसाइट – पाठ्यक्रम और अधिसूचना: https://upsc.gov.in/

  • पत्र सूचना कार्यालय (PIB) – सरकारी घोषणाएं: https://pib.gov.in/

  • NCERT आधिकारिक वेबसाइट – यूपीएससी के लिए मानक पुस्तकें: https://ncert.nic.in

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लेखक के बारे में

गजेंद्र सिंह गोदारा

विकास | एफटीई | सिगआईक्यू में निवासी

गजेंद्र सिंह गोदारा आईआईटी बॉम्बे के स्नातक और एक यूपीएससी आकांक्षी हैं, जिन्होंने कई प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षाओं सहित 4 प्रयास किए हैं। वे राजनीति (Polity), आधुनिक इतिहास (Modern History), अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations) और अर्थव्यवस्था (Economy) के विशेषज्ञ हैं। PadhAI में, गजेंद्र अपने प्रत्यक्ष परीक्षा अनुभव का लाभ उठाकर जटिल अवधारणाओं को सरल बनाते हैं, जिससे उच्च दक्षता वाली अध्ययन सामग्री तैयार होती है जो आकांक्षियों को समय बचाने और केंद्रित रहने में मदद करती है।

नवीनतम यूपीएससी परीक्षा 2026 अपडेट

यूपीएससी सीएसई (UPSC CSE) 2025 के लिए चयनित उम्मीदवारों की अंतिम सूची अब उपलब्ध है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए श्रेणी-वार कट-ऑफ अंक देखें।
वर्ष 2026 के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं का आधिकारिक कार्यक्रम 15 मई 2025 को जारी किया गया है।
यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 के परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए गए हैं।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए अपडेटेड और नवीनतम पाठ्यक्रम की जांच करें।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 की आधिकारिक अधिसूचना 22 जनवरी 2025 को जारी की गई थी।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) 2025 का प्रश्न पत्र अनौपचारिक उत्तर कुंजी (answer key) के साथ प्राप्त करें।

यूपीएससी परीक्षा तिथियां 2026

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) 2026 का आयोजन 24 मई 2026 को किया जाएगा, और यूपीएससी मुख्य परीक्षा (UPSC Mains) 2026 की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होगी।

यूपीएससी चयन प्रक्रिया

यूपीएससी सिविल सेवा चयन प्रक्रिया में तीन चरण शामिल हैं: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार।

यूपीएससी परिणाम 2024 और अंकतालिका

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 का परिणाम आधिकारिक मार्कशीट के साथ जारी कर दिया गया है।

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यूपीएससी परीक्षा तिथियां 2026

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) 2026 का आयोजन 24 मई 2026 को किया जाएगा, और यूपीएससी मुख्य परीक्षा (UPSC Mains) 2026 की शुरुआत 21 अगस्त 2026 से होगी।

यूपीएससी चयन प्रक्रिया

यूपीएससी सिविल सेवा चयन प्रक्रिया में तीन चरण शामिल हैं: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार।

यूपीएससी परिणाम 2024 और अंकतालिका

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 का परिणाम आधिकारिक मार्कशीट के साथ जारी कर दिया गया है।

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