यूपीएससी पाठ्यक्रम 2026: संपूर्ण आईएएस प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू गाइड

गजेंद्र सिंह गोदारा
14
मिनट का पठन

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) भारत की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करती है। एक व्यवस्थित तैयारी के लिए 2025 के अद्यतन (अपडेटेड) पाठ्यक्रम को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे उम्मीदवारों को प्रासंगिक विषयों पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी अध्ययन योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
UPSC CSE 2026 को समझना
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) हर साल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) जैसी अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए उम्मीदवारों की भर्ती के लिए सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। परीक्षा प्रक्रिया को तीन चरणों में संरचित किया गया है:
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) - वस्तुनिष्ठ प्रकार की स्क्रीनिंग परीक्षा।
मुख्य परीक्षा (Mains) - योग्यता रैंकिंग के लिए वर्णनात्मक पेपर।
व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार) - सार्वजनिक सेवा में करियर के लिए उम्मीदवारों की उपयुक्तता का मूल्यांकन।
UPSC CSE 2026 के लिए मुख्य तिथियां
अधिसूचना जारी होने की तिथि: 14 जनवरी 2026
आवेदन करने की अंतिम तिथि: 3 फरवरी 2026
प्रारंभिक परीक्षा की तिथि: 24 मई 2026
मुख्य परीक्षा शुरू होने की तिथि: 21 अगस्त 2026
नोट: ये तिथियां आधिकारिक UPSC कैलेंडर 2026 पर आधारित हैं। उम्मीदवारों को किसी भी अपडेट या बदलाव के लिए नियमित रूप से UPSC की आधिकारिक वेबसाइट देखनी चाहिए।
कीवर्ड: यूपीएससी परीक्षा के चरण, सिविल सेवा चयन प्रक्रिया
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प्रारंभिक परीक्षा 2026 के लिए विस्तृत पाठ्यक्रम
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में दो पेपर होते हैं, दोनों वस्तुनिष्ठ (objective) प्रकार के होते हैं:
सामान्य अध्ययन पेपर-I (GS-I)
इसमें निम्नलिखित विषयों से 100 प्रश्न शामिल होते हैं, जो अधिकतम 200 अंकों के होते हैं और इन्हें 2 घंटे में हल करना होता है।
भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन: प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास; स्वतंत्रता संग्राम; स्वतंत्रता के बाद का एकीकरण।
भारत और विश्व का भूगोल: भारत और विश्व का भौतिक, सामाजिक और आर्थिक भूगोल।
भारतीय राजव्यवस्था और शासन: संविधान, राजनीतिक व्यवस्था, पंचायती राज, सार्वजनिक नीति, अधिकारों से जुड़े मुद्दे।
आर्थिक और सामाजिक विकास: सतत विकास, गरीबी, समावेश, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र की पहल।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, संरक्षण पहल।
सामान्य विज्ञान: भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास।
समसामयिक मामले (Current Affairs): शासन, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और पर्यावरण से संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ।
सामान्य अध्ययन पेपर-II (CSAT)
इसमें निम्नलिखित विषयों से 80 प्रश्न शामिल होते हैं, जो अधिकतम 200 अंकों के होते हैं और इन्हें 2 घंटे में हल करना होता है।
बोधगम्यता और पारस्परिक कौशल: अंग्रेजी और हिंदी बोधगम्यता (Comprehension)।
तार्किक विचार और विश्लेषणात्मक क्षमता: विश्लेषणात्मक समस्या-समाधान, पहेलियां और तर्कशक्ति।
निर्णय लेना और समस्या-समाधान: स्थितिजन्य विश्लेषण और शासन-आधारित निर्णय लेना।
बुनियादी संख्यात्मकता और डेटा व्याख्या: संख्याएं, बीजगणित, ज्यामिति, क्षेत्रमिति, अनुपात, औसत, प्रतिशत, डेटा पर्याप्तता।
CSAT केवल क्वालिफाइंग प्रकृति का है, जिसके लिए न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
नोट: प्रारंभिक परीक्षा के दोनों पेपरों में नकारात्मक अंकन (Negative Marking) का प्रावधान है। सामान्य अध्ययन पेपर-I और CSAT दोनों में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए प्रश्न को आवंटित अंकों का 1/3 भाग काट लिया जाता है।
मुख्य परीक्षा 2026 के लिए विस्तृत पाठ्यक्रम
मुख्य परीक्षा (Mains) में नौ पेपर होते हैं, जिनमें से दो क्वालिफाइंग (अर्हता प्राप्त करने वाले) होते हैं और सात पेपरों के अंकों को योग्यता रैंकिंग (merit ranking) के लिए गिना जाता है:
क्वालिफाइंग पेपर (केवल योग्यता उद्देश्यों के लिए, मेरिट में नहीं गिने जाते)
पेपर ए (Paper A): भारतीय भाषाओं में से एक (संविधान की 8वीं अनुसूची के अनुसार)।
पेपर बी (Paper B): अंग्रेजी भाषा।
नोट: भारतीय भाषा पेपर (पेपर ए) में बैठने की अनिवार्यता से कुछ विशिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम के उम्मीदवारों को छूट दी गई है, साथ ही उन विकलांग उम्मीदवारों (जैसे सुनने में असमर्थता) को भी छूट प्राप्त है जिन्हें यूपीएससी द्वारा छूट दी गई है।
मेरिट-आधारित पेपर (कुल: 1750 अंक)
पेपर I: निबंध (250 अंक)
उम्मीदवारों को दो खंडों में से प्रत्येक से एक विषय चुनकर दो निबंध लिखने होते हैं। निबंधों में विचारों की स्पष्टता, सुसंगत संरचना, आलोचनात्मक विश्लेषण और एक संतुलित दृष्टिकोण झलकना चाहिए। इस पेपर के लिए तथ्यात्मक सटीकता की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह रचनात्मकता, प्रासंगिकता और गहराई का मूल्यांकन करता है।
खंड ए और बी के विषय (Themes): विषयों में दार्शनिक विचार, नैतिक दुविधाएं, सामाजिक-राजनीतिक विषय, आर्थिक बहस, अंतर्राष्ट्रीय मामले और तकनीकी प्रभाव शामिल हो सकते हैं।
परीक्षण किए जाने वाले कौशल (Skills Tested): विचारों का तार्किक प्रवाह, विचारों की मौलिकता, संतुलित आलोचना और प्रभावी भाषा अभिव्यक्ति।
रणनीति (Strategy): उम्मीदवारों को अपने तर्कों के समर्थन के लिए उदाहरणों, उपाख्यानों, संवैधानिक मूल्यों और वास्तविक जीवन के मामलों का सहारा लेना चाहिए।
पेपर II: सामान्य अध्ययन I (GS-I)
भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास और भूगोल तथा समाज (250 अंक)
भारतीय संस्कृति: प्राचीन, मध्यकालीन से लेकर आधुनिक काल तक की भारतीय कला, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलुओं को शामिल करता है। इसमें मंदिर और गुफा वास्तुकला, शास्त्रीय और लोक कला, प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ और धर्मों का प्रभाव शामिल है।
आधुनिक भारतीय इतिहास: 18वीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक - महत्वपूर्ण घटनाएँ, आंदोलन और व्यक्तित्व।
स्वतंत्रता संग्राम: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरण और महत्वपूर्ण पड़ाव, प्रमुख नेता और विभिन्न क्षेत्रों से उनका योगदान।
स्वतंत्रता के बाद का भारत: 1947 के बाद देश के भीतर एकीकरण और राज्यों का पुनर्गठन, भाषाई मुद्दे और सामाजिक-राजनीतिक विकास।
विश्व का इतिहास: 18वीं शताब्दी की घटनाएँ जैसे औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनः निर्धारण, उपनिवेशवाद और वि-औपनिवेशीकरण, और वैचारिक बदलाव (पूंजीवाद, साम्यवाद, समाजवाद)।
भारतीय समाज: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, विविधता में एकता, जाति, वर्ग, लिंग के मुद्दे, महिलाओं की भूमिका और उनके संगठन।
सामाजिक मुद्दे: जनसंख्या और उससे जुड़ी चुनौतियाँ, शहरीकरण और उसकी समस्याएँ, गरीबी, विकासात्मक मुद्दे और प्रवासन।
वैश्वीकरण और भारतीय समाज: पारिवारिक संरचना, कार्य संस्कृति और मूल्य प्रणालियों पर वैश्वीकरण का प्रभाव।
सामाजिक अधिकारिता: सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, धर्मनिरपेक्षता - इनके प्रभाव और भारतीय लोकतंत्र के सामने चुनौतियाँ।
विश्व का भूगोल: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएं जिनमें भू-आकृतियाँ, जल निकाय, जलवायु क्षेत्र आदि शामिल हैं।
संसाधनों का वितरण: दुनिया भर में मुख्य प्राकृतिक संसाधन, विशेष रूप से दक्षिण एशिया और भारत में।
उद्योग स्थापना के कारक: प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करने वाले कारक।
भू-भौतिकीय घटनाएँ: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, चक्रवात और उनके कारण व प्रभाव।
पर्यावरणीय परिवर्तन: नदियों, ग्लेशियरों जैसे भौगोलिक लक्षणों और पारिस्थितिकी प्रणालियों में परिवर्तन तथा वनस्पतियों, जीवों और मानव बस्तियों पर उनके प्रभाव।
पेपर III: सामान्य अध्ययन II (GS-II)
शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (250 अंक)
भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विशेषताएं, संशोधन, प्रस्तावना, संघीय ढांचा और अन्य संविधानों के साथ तुलना।
शक्तियों का पृथक्करण: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का कामकाज, नियंत्रण और संतुलन, न्यायिक सक्रियता और संयम।
राजव्यवस्था और शासन व्यवस्था: कैग (CAG), चुनाव आयोग, एनएचआरसी (NHRC) और अन्य जैसी संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका।
संसद और राज्य विधायिकाएँ: संरचना, कामकाज, शक्तियां, विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
कल्याणकारी योजनाएं: केंद्र और राज्यों द्वारा कमजोर वर्गों के लिए योजनाएं व नीतियां और उनका प्रदर्शन।
सामाजिक न्याय: गरीबी, भूख, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र के विकास से संबंधित मुद्दे।
एनजीओ (NGOs) और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका: विकास और सामाजिक पूंजी निर्माण में गैर-राज्य कार्यकर्ताओं का योगदान।
पारदर्शिता और जवाबदेही: पारदर्शिता सुनिश्चित करने में आरटीआई (RTI), ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों और नागरिक चार्टर की भूमिका।
सिविल सेवाएँ: लोकतंत्र में भूमिका, मूल्य, नैतिकता और लोक प्रशासन में सुधार।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी देश, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा समझौते।
वैश्विक संस्थान: संयुक्त राष्ट्र (UN) और उसकी एजेंसियां, डब्ल्यूटीओ (WTO), आईएमएफ (IMF), विश्व बैंक, ब्रिक्स (BRICS), जी-20 (G20) और उनका कामकाज।
भारत की विदेश नीति: रणनीतिक साझेदारी, प्रवासी नीति और वैश्विक कूटनीति तथा शांति स्थापना में भारत की भूमिका।
पेपर IV: सामान्य अध्ययन III (GS-III)
प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन (250 अंक)
भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना: विकास, प्रगति और समावेशी विकास के मुद्दे। सरकारी बजट, प्रमुख आर्थिक सुधार और उदारीकरण।
कृषि: कृषि सुधार, फसल पैटर्न, सिंचाई तकनीक, एमएसपी (MSP), पीडीएस (PDS), कृषि-तकनीक, खाद्य सुरक्षा और सब्सिडी।
उद्योग और बुनियादी ढांचा: विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका, निवेश मॉडल, पीपीपी (PPPs), औद्योगिक गलियारे।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी: हाल के विकास, भारतीयों की उपलब्धियां, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण, और आईटी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी, बायोटेक जैसे क्षेत्रों में जागरूकता।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी: संरक्षण प्रयास, प्रदूषण प्रबंधन, पर्यावरण क्षरण, सतत विकास, ईआईए (EIA)।
जलवायु परिवर्तन: पेरिस समझौते, क्योटो प्रोटोकॉल जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौते, और हरित विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धताएं।
जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण: वन संरक्षण, संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क, लुप्तप्राय प्रजातियां और कानूनी ढांचे (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, आदि)।
आपदा प्रबंधन: संवेदनशीलता प्रोफाइलिंग, जोखिम शमन, संकट प्रतिक्रिया, क्षमता निर्माण और एनडीएमए (NDMA) जैसी संस्थाओं की भूमिका।
आंतरिक सुरक्षा: सीमा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग, सुरक्षा चुनौतियाँ।
विकास और उग्रवाद के बीच संबंध: उग्रवाद को बढ़ावा देने में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं की भूमिका।
पेपर V: सामान्य अध्ययन IV (GS-IV)
नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि (250 अंक)
यह पेपर सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा से संबंधित मुद्दों के प्रति उम्मीदवार के दृष्टिकोण और रुख, तथा उनके सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों और संघर्षों के समाधान खोजने के कौशल का परीक्षण करता है। इसमें केस स्टडीज की प्रचुरता होती है और यह सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय नैतिक जागरूकता को मापता है।
नीतिशास्त्र और मानवीय सह-संबंध: इसमें नीतिशास्त्र का सार, व्यक्तिगत और सार्वजनिक संबंधों में नैतिक व्यवहार के निर्धारक और परिणाम, तथा नीतिशास्त्र के आयाम शामिल हैं। नैतिक अवधारणाओं जैसे कि सही, गलत, कर्तव्य, गुण और अंतरात्मा की समझ।
मानवीय मूल्य: मूल्यों को विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका; भारत और विश्व के नैतिक विचारकों और दार्शनिकों का योगदान।
अभिरुचि (एटीट्यूड): सामग्री, संरचना, कार्य, विचार और व्यवहार के साथ इसका प्रभाव और संबंध। नैतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण, और शासन तथा सार्वजनिक मामलों में उनकी भूमिका।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EI): भावनात्मक बुद्धिमत्ता की अवधारणाएं, प्रशासन और शासन में इसकी उपयोगिता और अनुप्रयोग। लोक सेवा में सहानुभूति, करुणा और भावनात्मक नियंत्रण।
लोक/सिविल सेवा मूल्य और लोक प्रशासन में नैतिकता: स्थिति और समस्याएं; सरकारी और निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएं और दुविधाएं; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में कानून, नियम, विनियम और अंतरात्मा। आचार संहिता, कार्य संस्कृति, सेवा वितरण की गुणवत्ता, सार्वजनिक धन का उपयोग और भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
शासन व्यवस्था में ईमानदारी (सत्यनिष्ठा): लोक सेवा की अवधारणा; शासन और ईमानदारी का दार्शनिक आधार। सरकार में सूचनाओं का आदान-प्रदान और पारदर्शिता; सूचना का अधिकार; आचार संहिता और नैतिक संहिता; नागरिक चार्टर; कार्य संस्कृति; सार्वजनिक धन का उपयोग; भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
केस स्टडीज: शासन के संदर्भ में नैतिक निर्णय लेने, मूल्यों के अनुप्रयोग और प्रतिस्पर्धी हितों को संतुलित करने वाले वास्तविक जीवन की स्थितियों पर आधारित।
पेपर VI और VII: वैकल्पिक विषय (250 + 250 = 500 अंक)
उम्मीदवारों को यूपीएससी द्वारा प्रदान की गई 48 विषयों की सूची में से एक वैकल्पिक विषय चुनना होगा। यह पेपर उम्मीदवारों को अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि या रुचि के विषय पर गहन ज्ञान और पकड़ प्रदर्शित करने की अनुमति देता है।
पेपर I: विषय के मूलभूत सिद्धांतों, सिद्धांतों और अवधारणाओं से संबंधित है, जो अक्सर अधिक स्थिर और सैद्धांतिक होते हैं।
पेपर II: भारत-विशिष्ट अनुप्रयोग, समकालीन प्रासंगिकता, केस अध्ययन और भारतीय संदर्भ में मुद्दों पर केंद्रित है।
लोकप्रिय वैकल्पिक विषय:
मानविकी (Humanities): राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (PSIR), समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, नृविज्ञान, इतिहास।
विज्ञान और तकनीकी: भूगोल, मनोविज्ञान, गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग विषय।
साहित्य: अंग्रेजी, हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं।
वैकल्पिक विषय का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है और अक्सर अंतिम रैंकिंग को काफी प्रभावित करता है। उम्मीदवारों को रुचि, संसाधनों की उपलब्धता और सामान्य अध्ययन (GS) के विषयों के साथ ओवरलैप के आधार पर चुनाव करना चाहिए।
यूपीएससी मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों की सूची
तकनीकी/व्यावसायिक | मानविकी और सामाजिक विज्ञान | भाषा/साहित्य |
|---|---|---|
कृषि | नृविज्ञान | असमिया, बंगाली, बोडो |
पशुपालन और पशुचिकित्सा विज्ञान | भूगोल | डोगरी, गुजराती, हिंदी |
वनस्पति विज्ञान | इतिहास | कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी |
रसायन विज्ञान | कानून (विधि) | मैथिली, मलयालम, मणिपुरी |
सिविल इंजीनियरिंग | प्रबंधन | मराठी, नेपाली, उड़िया |
वाणिज्य और लेखा | दर्शनशास्त्र | पंजाबी, संस्कृत, संथाली |
अर्थशास्त्र | राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | सिंधी, तमिल, तेलुगु |
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग | मनोविज्ञान | |
भूविज्ञान | लोक प्रशासन | |
गणित | समाजशास्त्र | |
मैकेनिकल इंजीनियरिंग | सांख्यिकी | |
चिकित्सा विज्ञान | - | |
भौतिकी | - |
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सामान्य परीक्षा दिशानिर्देश और प्रक्रियात्मक विवरण
यह खंड विशेष रूप से पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए यह समझने में सहायक है कि यूपीएससी मुख्य परीक्षा (UPSC Mains) का आयोजन और मूल्यांकन कैसे किया जाता है।
अर्हता प्राप्त करने वाले भाषा के प्रश्नपत्र (Qualifying Language Papers):
प्रश्नपत्र ए (भारतीय भाषा) और प्रश्नपत्र बी (अंग्रेजी) की प्रकृति अर्हता प्राप्त (क्वालीफाइंग) करने की होती है। उम्मीदवारों को प्रत्येक में कम से कम 25% अंक प्राप्त करने होंगे।
ये प्रश्नपत्र मैट्रिकुलेशन या कक्षा दसवीं के स्तर के होते हैं और मेरिट सूची में इनका योगदान नहीं होता है।
मेरिट रैंकिंग मानदंड:
अंतिम मेरिट के लिए प्रश्नपत्र I से प्रश्नपत्र VII (निबंध + मुख्य सामान्य अध्ययन I से IV + वैकल्पिक प्रश्नपत्र I और II) के अंकों पर विचार किया जाता है।
परीक्षा का माध्यम और भाषा के विकल्प:
सभी प्रश्नपत्र (भाषा के प्रश्नपत्रों को छोड़कर) वर्णनात्मक (निबंध) प्रकार के होते हैं।
उम्मीदवार भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं में से किसी एक भाषा या अंग्रेजी में उत्तर लिख सकते हैं।
साहित्य के विषयों को छोड़कर, प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी और हिंदी में तैयार किए जाते हैं।
प्रश्नपत्र की अवधि:
प्रत्येक प्रश्नपत्र की अवधि 3 घंटे की होती है। दृष्टिबाधित उम्मीदवारों और विशिष्ट शारीरिक विकलांगता वाले उम्मीदवारों को प्रति घंटा 20 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
साहित्य के प्रश्नपत्रों का माध्यम:
यदि कोई उम्मीदवार वैकल्पिक विषय के रूप में किसी साहित्य के विषय को चुनता है, तो उसे केवल संबंधित भाषा में ही प्रश्नपत्र का उत्तर देना होगा।
कोई नकारात्मक अंकन (Negative Marking) नहीं:
मुख्य परीक्षा में कोई नकारात्मक अंकन नहीं होता है। हालांकि, अस्पष्ट या विषय से हटकर लिखी गई बातों के कारण शून्य अंक मिल सकते हैं।
उत्तर लिखने के सुझाव (Answer Writing Tips):
शब्द सीमा का सख्ती से पालन करें।
जहां भी प्रासंगिक हो, शीर्षकों (headings), उपशीर्षकों (subheadings), बुलेट बिंदुओं (bullet points) और आरेखों (diagrams) का उपयोग करें।
प्रश्न की मांग के अनुरूप रहें – प्रस्तावना, मुख्य भाग और निष्कर्ष।
हाल के सुधार:
UPSC ने नैतिक और विश्लेषणात्मक सोच पर ध्यान केंद्रित करना बढ़ा दिया है, जिसके लिए अंतःविषय (interdisciplinary) जागरूकता की आवश्यकता होती है।
विशेष रूप से जीएस प्रश्नपत्र II, III और निबंध में, समसामयिक मामलों (current affairs) के जुड़ाव पर भी जोर दिया गया है।
व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार)
परीक्षा पैटर्न और अंकन योजना
u092au094du0930u093eu0930u0902u092du093fu0915 u092au0930u0940u0915u094du0937u093e (Prelims): 2 u092au0947u092au0930 (400 u0905u0902u0915)
u092eu0941u0916u094du092f u092au0930u0940u0915u094du0937u093e (Mains): 9 u092au0947u092au0930 (1750 u0905u0902u0915)
u0938u093eu0915u094du0937u093eu0924u094du0915u093eu0930 (Interview): 275 u0905u0902u0915
u0905u0902u0924u093fu092e u092fu094bu0917u094du092fu0924u093e u0938u0942u091au0940: u092eu0941u0916u094du092f u092au0930u0940u0915u094du0937u093e + u0938u093eu0915u094du0937u093eu0924u094du0915u093eu0930 = 2025 u0905u0902u0915
तैयारी की रणनीतियाँ
1. पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न को समझें
प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षा दोनों के लिए विस्तृत पाठ्यक्रम से खुद को अपडेट रखें।
विषयों के पैटर्न और वेटेज को समझने के लिए पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करें।
2. एक मजबूत आधार बनाएं
इतिहास, भूगोल, राजनीति (Polity), अर्थव्यवस्था और विज्ञान जैसे विषयों में एक मजबूत आधार बनाने के लिए कक्षा 6 से 12 तक की NCERT पाठ्यपुस्तकों से शुरुआत करें।
राजनीति के लिए लक्ष्मीकांत, आधुनिक इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम और पर्यावरण के लिए शंकर IAS जैसी मानक पुस्तकों का संदर्भ लें।
3. समसामयिकी (Current Affairs) से अपडेट रहें
द हिंदू (The Hindu) या इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) जैसे समाचार पत्र दैनिक पढ़ें।
योजना और कुरुक्षेत्र जैसी मासिक पत्रिकाओं का अध्ययन करें।
दैनिक समसामयिकी अपडेट के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऐप्स का उपयोग करें।
4. उत्तर लेखन का अभ्यास करें
अपनी तैयारी के शुरुआती दिनों से ही मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए उत्तर लेखन का अभ्यास शुरू करें।
अपने उत्तरों को एक स्पष्ट प्रस्तावना, मुख्य भाग और निष्कर्ष के साथ तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करें।
जहां आवश्यक हो, प्रासंगिक उदाहरण, डेटा और आरेख (डायग्राम) शामिल करें।
5. नियमित मॉक टेस्ट लें
प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए टेस्ट सीरीज़ में शामिल हों।
कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने और उन पर काम करने के लिए मॉक टेस्ट में अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करें।
6. नियमित रूप से रिवीजन करें
त्वरित रिवीजन के लिए संक्षिप्त नोट्स बनाएं।
परीक्षा से पहले स्टैटिक हिस्से और समसामयिकी का कई बार रिवीजन करें।
अपनी UPSC की तैयारी को बेहतर बनाना चाहते हैं? PadhAI आपका ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म है जिसमें दैनिक समसामयिकी (current affairs), अर्थ-आधारित PYQs, 24/7 AI ट्यूटरचैट, मॉक परीक्षाएं, गेमिफाइड क्विज़, CSAT अभ्यास और NCERT पाठ्यपुस्तकें शामिल हैं—वह सब कुछ जो आपको आगे रहने और सफल होने के लिए चाहिए!
शुरुआती लोगों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
NCERTs और बुनियादी संसाधनों से शुरुआत करें: उन्नत पुस्तकों की ओर बढ़ने से पहले एक मजबूत आधार बनाएं।
एक सतत अध्ययन योजना विकसित करें: स्थिर विषयों और समसामयिक मामलों को संतुलित करते हुए एक संरचित समय सारिणी का पालन करें।
नियमित रूप से दोहराएं: छोटे नोट्स बनाकर और साप्ताहिक रूप से दोहराकर सीखने को सुदृढ़ करें।
पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र हल करें: प्रश्नों के प्रारूप, उनके महत्व और बार-बार पूछे जाने वाले विषयों को समझें।
UPSC सूचनाओं के साथ अपडेट रहें: आधिकारिक UPSC घोषणाओं और परीक्षा से संबंधित अपडेट का पालन करें।
2025 के लिए यूपीएससी (UPSC) का सिलेबस क्या है?
अंतिम योग्यता सूची (मेरिट लिस्ट) कैसे तैयार की जाती है?
क्या CSAT का पेपर क्वालिफाइंग प्रकृति का होता है?
यूपीएससी (UPSC) साक्षात्कार की अवधि कितनी होती है?
यूपीएससी मेन्स (UPSC Mains) में कितने वैकल्पिक विषय होते हैं?
यूपीएससी पाठ्यक्रम 2026 की पूरी समझ संरचित तैयारी और परीक्षा में सफलता के लिए आवश्यक है। उम्मीदवारों को आधिकारिक सूचनाओं के साथ अपडेट रहना चाहिए और एक अनुशासित अध्ययन योजना पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन फलदायी यात्रा है। पाठ्यक्रम की स्पष्ट समझ, एक रणनीतिक अध्ययन योजना और निरंतर प्रयास के साथ, सफलता प्राप्त की जा सकती है। ध्यान केंद्रित रखें, प्रेरित रहें और याद रखें कि दृढ़ता ही कुंजी है।
अधिक संसाधनों और अपडेट के लिए, नियमित रूप से यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट
पाठ्यक्रम और अधिसूचना
अनुसंधान पद्धति
PadhAI की शोध पद्धति (research methodology) सुनिश्चित करती है कि हर लेख सटीक, UPSC के अनुकूल और शुरुआती उम्मीदवारों के लिए समझने में आसान हो। हम The Hindu, Indian Express और PIB से मिलान करके UPSC परीक्षा की प्रासंगिकता के आधार पर करंट अफेयर्स विश्लेषण तैयार करते हैं। सामान्य अध्ययन (GS) के विषयों को NCERT और मानक पुस्तकों जैसे कि एम. लक्ष्मीकांत, स्पेक्ट्रम और जीसी लियोंग से तैयार किया जाता है, और फिर तथ्यों की त्रुटियों को दूर करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है। इसके अतिरिक्त, हम उम्मीदवारों को सत्यापित सरकारी परीक्षा अधिसूचनाओं के साथ-साथ सर्वोत्तम संसाधनों, पाठ्यक्रम और प्रारंभिक (Prelims) व मुख्य (Mains) परीक्षा की व्यापक रणनीतियों का सुझाव देने वाले विशेषज्ञ ब्लॉग भी प्रदान करते हैं।
गजेंद्र सिंह गोदारा आईआईटी बॉम्बे के स्नातक और एक यूपीएससी आकांक्षी हैं, जिन्होंने कई प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षाओं सहित 4 प्रयास किए हैं। वे राजनीति (Polity), आधुनिक इतिहास (Modern History), अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations) और अर्थव्यवस्था (Economy) के विशेषज्ञ हैं। PadhAI में, गजेंद्र अपने प्रत्यक्ष परीक्षा अनुभव का लाभ उठाकर जटिल अवधारणाओं को सरल बनाते हैं, जिससे उच्च दक्षता वाली अध्ययन सामग्री तैयार होती है जो आकांक्षियों को समय बचाने और केंद्रित रहने में मदद करती है।
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